डोसा के शौकीन थे राकेश झुनझुनवाला, अगले जन्म के लिए भगवान से की थी ये डिमांड

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी पंजीकरण

एक प्राइवेट लिमिटेड क्या है कंपनी (प्राइवेट लिमिटेड)?

एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी एक निजी तौर पर आयोजित लघु व्यवसाय इकाई है। एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के सदस्यों की देयता कि सदस्य द्वारा धारित शेयरों की संख्या तक सीमित है। एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी कंपनी अधिनियम, 2013 द्वारा शासित है। एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी शुरू करने के लिए आवश्यक शेयरधारकों की न्यूनतम संख्या दो है, जबकि सदस्यों की ऊपरी सीमा को कंपनी अधिनियम, 2013 के अनुसार 200 है।

एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी वित्तीय जोखिम का सामना कर रहे हैं, तो अपने शेयरधारकों को अपनी व्यक्तिगत परिसंपत्तियों को बेचने के यानी वे देयता सीमित है उत्तरदायी नहीं हैं। वहाँ एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के लिए कम से कम दो निदेशकों और अधिकतम 15 निर्देशकों होना चाहिए और एक निर्देशक के युग में ऊपर 18 वर्ष होनी चाहिए। एक विदेशी नागरिक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी भारत के एक निर्देशक बन सकता है।

यह एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी भारत के नाम करने के लिए प्राइवेट लिमिटेड (प्राइवेट लिमिटेड) जोड़ने के लिए अनिवार्य है। एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के लिए न्यूनतम चुकता पूंजी राशि रुपये है। 1 लाख। एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी यहां तक ​​कि मौत या उसके सदस्यों के दिवालिएपन के मामले में मौजूदा ट्रेडिंग शुरू करने के लिए कौन सी पूंजी रहती है।

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Rakesh Jhunjhunwala Death: बियर से बिग बुल बनने की कहानी, हर्षद मेहता के दौर में जमाई धाक

राकेश झुनझुनवाला को बिग बुल के नाम से जाना जाता है लेकिन दिलचस्प ये भी है कि उन्होंने जब ट्रेडिंग शुरू की तब बियर के तौर पर दांव लगाते थे। ये वो दौर था जब हर्षद मेहता को बिग बुल कहा जाता था।

Rakesh Jhunjhunwala Death: बियर से बिग बुल बनने की कहानी, हर्षद मेहता के दौर में जमाई धाक

Rakesh Jhunjhunwala Death: शेयर बाजार के दिग्गज निवेशक राकेश झुनझुनवाला का निधन हो गया है। वह लंबे समय से बीमार थे। ट्रेडिंग शुरू करने के लिए कौन सी पूंजी शेयर बाजार की दुनिया में राकेश झुनझुनवाला को बिग बुल के नाम से जाना जाता है लेकिन दिलचस्प ये भी है कि उन्होंने जब ट्रेडिंग शुरू की तब बियर के तौर पर दांव लगाते थे। ये वो दौर था जब हर्षद मेहता को बिग बुल कहा जाता था।

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परिवार से मिली समझ: बचपन में राकेश झुनझुनवाला को कारोबारी समझ परिवार से ही मिलने लगी थी। दरअसल, बिग बुल के पिता एक आयकर अधिकारी थे। झुनझुनवाला ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके पिता ये समझाते रहते थे कि कैसे खबरों का असर शेयर बाजार पर पड़ता है। झुनझुनवाला ने पहली बार 1985 में शेयर बाजार में दांव लगाा। ये वो वक्त था जब वह सिडनहैम कॉलेज में पढाई करते थे। उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंसी की पढ़ाई की और शेयर बाजार में निवेश करने और बारीकियां समझने में जुट गए। राकेश झुनझुनवाला ने केवल 5,000 रुपए की छोटी-सी पूंजी से शेयर बाजार में निवेश शुरू किया था। शुरुआती दिनों में झुनझुनवाला को तगड़ा नुकसान हुआ। हालांकि, स्टॉक मार्केट में पहली जीत Tata tea से मिली। इस कंपनी में उनका पैसा तीन गुना बढ़ गया था। असल में 43 रुपये की कीमत पर झुनझुनवाला ने टाटा टी के 5,000 शेयर ट्रेडिंग शुरू करने के लिए कौन सी पूंजी खरीदें थे। 1986 में उन्होंने इस शेयर से 5 लाख रुपये का मुनाफा कमाया था।

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शॉट सेल के माहिर खिलाड़ी: झुनझुनवाला को शॉर्ट सेल का माहिर खिलाड़ी माना जाता है। एक इंटरव्यू में झुनझुनवाला ने खुद बताया था कि उन्होंने शेयर बेचकर खूब पैसा बनाए हैं। दरअसल, 1992 में हर्षद मेहता घोटाले के सामने आने के बाद शेयर बाजार क्रैश हो गया था। इस दौर में झुनझुनवाला ने खूब शॉर्ट सेलिंग की थी।

टाइटन से प्रेम: शेयर बाजार में झुनझुनवाला का सबसे पसंदीदा स्टॉक घड़ी और आभूषण बनाने वाली कंपनी टाइटन की रही है। यह टाटा समूह का हिस्सा है। इस कंपनी में हिस्सेदारी लगाकर उन्होंने खूब पैसे कमाए। 31 मार्च, 2021 को ट्रेडिंग शुरू करने के लिए कौन सी पूंजी समाप्त तिमाही के अंत में राकेश झुनझुनवाला के पास टाइटन कंपनी, टाटा मोटर्स, क्रिसिल, ल्यूपिन, फोर्टिस हेल्थकेयर, नज़र टेक्नोलॉजीज, ट्रेडिंग शुरू करने के लिए कौन सी पूंजी फेडरल बैंक, डेल्टा कॉर्प, डीबी रियल्टी और टाटा कम्युनिकेशंस सहित 37 स्टॉक थे।

अकासा की अधूरी कहानी: राकेश झुनझुनवाला के लिए अकासा एयरलाइन को लॉन्च करना एक ड्रीम प्रोजेक्ट की तरह था। उन्होंने कई मौकों पर अकासा एयर की उड़ान सेवाओं के शुरू होने का जिक्र किया था। बीते 7 अगस्त को ही मुंबई से अहमदाबाद के बीच अकासा ने पहली उड़ान भरी। इसके ठीक 7 दिन बाद एयरलाइन के सबसे बड़े स्टेकहोल्डर यानी राकेश झुनझुनवाला ने अंतिम सांस ली है।

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